श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

सूर्योदय परिवार से जुड़े

सत्कार्यों से संबंध ईश्वर से संबंध के समान होता है | ऐसा भी माना जाता है, कि जिस व्यक्ति के जीवन में सत्कार्य नहीं, उसके मन में संवेदना नहीं और जहाँ संवेदना नहीं होती, वहां ईश्वर नहीं होता | आपको अपने सत्कार्यों एवं संवेदना के निर्वाह के लिए सूर्योदय आश्रम एवं संस्था से जुड़ सकते है | हर व्यक्ति के अन्दर ईश्वर द्वारा प्रदत्त सत्कार्यों की शक्ति होती है | आप इस ईश्वर के इस दायित्त्व का निर्वाह करें, संस्था से जुड़कर |


आप अपनी क्षमता अनुसार व श्रद्धानुसार संस्था के कार्यों से जुड़ सकते है | आप श्रम सेवा, ज्ञान सेवा आदि सत्कार्यों के माध्यम से संस्था से जुड़ सकते है | अगर आप चिकित्सक है तो कुछ गरीबों का निःशुल्क ईलाज करें, अगर आप अध्यापक है, तो गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दें | अपनी-अपनी योग्यतानुसार आप सत्कार्य करें और पुण्य कमायें |


सूर्योदय परिवार में जुड़े गुरुबंधुओं के लिए नियम

  • सूर्योदय परिवार में कार्य करते समय प्रत्येक व्यक्ति को संस्था की लिखित अनुमति या सूर्योदय परिवार सदस्यता प्रमाण पत्र लेना आवश्यक है |
  • अनुमति पत्र के आधार पर अपना सूर्योदय परिवार पहचान पत्र बनवाकर हमेशा अपने साथ रखें |
  • सूर्योदय परिवार में जुड़ने के पश्चात् अपने द्वारा किये गए कार्यों का मासिक विवरण संस्था मुख्यालय या संबंधित शाखा को देना अनिवार्य है |
  • सूर्योदय संगठन के साथ अन्य किसी संगठन से मिलकर कार्य कर रहे हैं, तो उसमे लिखित आवेदन तथा संबंध में लिखित पूर्व अनुमति प्राप्त करें |
  • बैनर, पोस्टर, या किसी भी तरह का प्रमोशन करने के लिए लिखित में अनुमति प्राप्त करें | बैनर, पोस्टर पर अधिक व्यय न करें |
  • संगठन में कार्य करते समय गुरुदेव तथा सूर्योदय परिवार का ध्यान रखें | ऐसा कोई कार्य न हो जिससे सूर्योदय आश्रम के लिए विपरीत प्रभाव हो |
  • संगठन के कार्यकर्ताओं का यथा योग्य सम्मान करें |एकता की भावना से कार्य करें |
  • संगठन में जो भी व्यक्ति कार्य करता है, उसकी किसी प्रकार की आलोचना न करे |
  • अपने बन्धु-बहिनों की तरह सभी का सम्मान करें |
  • संगठन में अहंकार का त्याग करें |
  • अपने किये कार्यों का बार-बार उल्लेख न करते हुए लिखित में उन कार्यों का प्रारूप बनाकर संगठन प्रमुख के पास सौपें |

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