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रक्षाबंधन पवित्रता का त्यौहार है - श्री भय्यूजी महाराज

तारीख : August 17, 2016 कुल देखें : 123

हमारी संस्कृति में प्रत्येक त्यौहार का अपना महत्व है। रक्षाबंधन पवित्रता का त्यौहार है। बहन और भाई के प्रेम का त्यौहार है। इस त्यौहार की प्रतिक्षा भाई बहनों को वर्ष भर रहती है। बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र के रूप में राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का, उसकी सहायता का वचन देता है। 



परिवार में बहन वह सदस्य है जो भाई के लिए प्रेरणा होती है। भाई बहन का आपस में बहुत प्रेम होता है। यदि भाई भूखा हो तो बहन उसके लिए भोजन की व्यवस्था करने में सबसे पहले तैयार होती है। घर वाले भाई के विरुद्ध कितना भी बोले परंतु बहन हमेशा भाई का ही पक्ष लेती है। भाई बहन का रिश्ता परिवार में बड़ा ही कर्त्तव्यनिष्ठा से निभाया जाता है। अमीर गरीब, उँच नीच, ज्ञान अज्ञान जैसी कोई दीवारे इस रिश्ते में नहीं आती। यह सिर्फ प्रेम का रिश्ता है। इसी भावना से व्यक्ति का मन निश्चल होता जाता है।  



बहन भाई के लिए मंगल कामना करती है और भाई बहन के सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करता है। बहन की एक हँसी से सारा परिवार चहक उठता है। वहीँ भाई बहन एक दूसरे का मार्गदर्शन करने में पीछे नहीं हटते। बहन जब विवाह के पश्चात दूसरे घर जाती है तब उसे सबसे अधिक प्रतिक्षा भाई की होती है। एक भाई अपनी बात खुलकर अपनी बहन को बता देता है। वह माता-पिता और अन्य लोगों को नहीं बता सकता क्योंकि उसे विश्वास रहता है कि विषम परिस्थितियों में बहन ही उसक़ा साथ देगी। वह उसका आधार स्तम्भ है। बहन को एश्वर्य धन संपत्ति की चाह नहीं होती वह तो सिर्फ भाई की आत्मीयता और प्रेम चाहती है। यही प्रेम का प्रतीक है। रेशमी धागे का जो हमारे यहाँ वर्षों से चला आ रहा है, यह संबंधों की ऐसी सरिता है, जिसके घाट पर बैठ कर व्यक्ति विश्वास अर्जित करता है। 



राखी की परम्पराएँ हमारे यहाँ बड़े सम्राटों ने भी निभाई है। यदि किसी राज्य में सुरक्षा की व्यवस्था का प्रश्न आता है तो वहां की महारानियों ने शत्रु पक्ष के राजा को राखी भेजी तो वह उस राखी का सम्मान करते है। उस राज्य की सुरक्षा का वचन देता था। 



श्री कृष्ण ने भरी सभा में द्रोपदी की लाज बचाई। महारानी लक्ष्मीबाई के साथ उसके भाई तात्या टोपे नाना साहेब पेशवे अंग्रेजों के विरुद्ध लाडे थे। हमारे ग्रामों में आज भी बेटी जिस गाँव में ब्याही हो, उस गाँव के घर को सम्मान देते है। गाँव के लोग उसी तरह बेटी को सम्मान देते है जैसे अपनी बहन को। 



भारतीय संस्कृति में सारे रिश्ते नाते धर्म के अनुसार चलते है। परिवार में पिता का, माता का, भाई का, बहन का अपना धर्म है और उसी के अनुसार परिवार बनते है, चलते है। उसी परिवार व्यक्ति का सामजिक कार्यों के लिए प्रेरणा देता है। संस्कार हमें परिवार से प्राप्त होते है। परिवार में आपसी प्रेम, सौहाद्रता, शालीनता एक दूसरे के सम्मान की भावना बनी रहेगी तो हम समाज में भी इसी तरह संवेदनाएं रखेंगे। 



रक्षाबंधन सामजिक एकात्मकता का भी प्रतीक  है। हमारी संस्कृति अलावा दूसरे संप्रदाय को मानाने वाले भाई बहन के पवित्र रिश्ते के निर्वाह के लिए राखी का त्यौहार मनाते है। 



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