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योग मन को शांति एवं शरीर को फुर्ती प्रदान करने वाली क्रिया हैं

तारीख : June 21, 2017 कुल देखें : 23

योग मन को शांति एवं शरीर को फुर्ती प्रदान करने वाली क्रिया हैं, जिससे शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखा जा सकता हैं | आज वर्ष के सबसे बड़े दिन को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता हैं | हमें भारतीयता पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि योग मूलतः भारत की ही देन हैं | भारत में ही अध्यात्म की राह पर चलकर योग द्वारा शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति प्राप्त करने हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया गया तथा हमारे भारत के ही माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा योग दिवस की पहल की गई जिसे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा और आज पूरा विश्व तीसरा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है |

योग का अर्थ होता है, जोड़ना एवं समाधी, जब तक हम स्वयं से नहीं जुड़ते हैं, तब तक समाधी तक नही पंहुचा जा सकता है और समाधी तक पहुँचने पर ही परमात्मा से मिलन संभव हैं |

प्राचीन काल में गुरुओं द्वारा योग की कई पद्धातियाँ स्वयं के अनुभवों से शुरू की गई , जिनका उपयोग आज भी मन के विकारों एवं शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए किया जा रहा हैं। 

नागपंथ वैष्णव , शैवपंथ और शाक्त ने अपने - अपने तरीके से योग का महत्व बताया एवं इसका विस्तार दिया -

यस्माद्द्ते न सिध्यति यज्ञों विपश्चितश्चन | सा धीनां योग मिन्वति ||



अर्थात योग के बिना विद्वान् का भी कोई यज्ञकर्म सिद्ध नहीं होता | वह योग क्या हैं। .. ? योग चित्तवृतियों का निरोध हैं, वह कर्तव्य कर्ममात्र में व्याप्त हैं। 

योग भारतभूमि की 5000 वर्ष पुरानी धरोहर हैं। भगवान शंकर से योग के बाद, ऋषि मुनियों से लेकर गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी सभी द्वारा अध्यात्म के मार्ग पर चलकर योग अपनाया गया



आज के व्यवस्थता भरे समय में जब व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक विकारों से जूझ रहा हैं , तो उसे योग के सही एवं नियमित अभ्यास से दूर किया जा सकता हैं। योग मानव को निरोग्य जीवन एवं मानसिक शांति के लिए अपनाना चाहिए ....

आज योग का महत्व बढ़ गया है, इसके बढ़ने का कारण व्यवस्थता और मन की व्यग्रता है, मनुष्य को योग की ज्यादा आवश्यकता है, जब मन और शरीर अत्यधिक तनावपूर्ण, वायु प्रदुषण तथा दौडभाग के जीवन से रोगग्रस्त हो चूका हैं, जिससे मानव का मन एवं मस्तिष्क संतुलित नही हो पा रहा हैं। योग, मानव को निरोग्य जीवन एवं मानसिक शांति के लिए अपनाना चाहिए...



मनुष्य अपने जीवन में आगे स्वस्थ होकर योग के माध्यम से ही बढ़ सकता हैं। इसीलिए योग के महत्त्व को समझना होगा। 

मनुष्य किसी की ओर केवल तभी आकर्षित होता हैं जब उसे उससे लाभ मिले , जिस तरह से हम योग की ओर आकर्षित हो रहे उससे यह स्पष्ट हैं की योग के कई फायदे हैं। 

योग सभी के लिए आवश्यक है चाहे स्त्री हो पुरुष , बच्चे हो या बूढ़े। योग से मन में सकारात्मक विचारों का प्रवाह एवं आध्यात्मिक बल प्राप्त होता हैं , और सफलता के लिए सकारात्मक विचारों का होना आवश्यक हैं जिससे मन में शांति, चिंता से दूरी, प्रसन्नता तथा उत्साह का प्रवाह होता है। 

तनाव ही कई बीमारियों की जड़ है , तनाव से मुक्ति के लिए भी योग कारगर साबित हो रहा हैं। आध्यात्मिक एवं बौद्धिक क्षमता में विकास, मानसिक क्षमताओं का विकास, शरीर को सेहतमंद बनाना, थकान मिटाना , तथा प्रत्येक प्रकार के शारीरिक कष्टों से निदान , यह सिर्फ योग द्वारा ही संभव हैं। विज्ञान द्वारा भी योग को चिकित्सीय पद्धति के रूप में अपनाया गया हैं। 

मेरा आप सभी से अनुरोध हैं, कि इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर स्वस्थ जीवन शैली और बेहतर जीवन जीने के लिए योग अपनाएँ। 

हमें बच्चो को भी योग के महत्व एवं उनसे जुड़े लाभ बताकर नियमित अभ्यास करवाना चाहिए , क्योंकि योग शरीर एवं मस्तिष्क को एक साथ संतुलित करके प्रकृति से जुड़ने का स्वस्थ, लाभदायक एवं सुरक्षित माध्यम हैं। यह हमारे पूर्वजों से प्राप्त अमूल्य उपहार हैं। 

योग के कई आसन होते हैं , जिनका सुरक्षित एवं निरंतर अभ्यास लाभप्रद हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा कर बिमारियों से राहत प्रदान करता हैं। 

योग के कई लाभ हैं जिनकी गणना नहीं की जा सकती हैं , यह शरीर को तंदरुस्ती, तनाव से मुक्ति , नकारात्मक विचारों से मुक्ति, मानसिक शुद्धता एवं शांति के साथ- साथ समझ विकसित कर प्रकृति से जोड़ता हैं। 

"स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है"

आइए इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रण ले - योग अपनाएं , निरोग्य और खुशहाल राष्ट्र बनायें।



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