श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

ब्लॉग

सफाई और स्वच्छता की मिशाल इंदौर

तारीख : June 14, 2017 कुल देखें : 10

इंदौर नंबर 1 शहर बन गया, सफाई और स्वच्छता की मिशाल देश के दुसरे शहरों में दी जाने लगी | इन सब से मैं भी खुश था लेकिन एक सच्चाई जिसे सुनकर शायद इस स्वच्छ शहर के दिल में बसने वालीं परेशानियों से अवगत होना जरुरी भी है |

इसी इंदौर शहर का एक नागरिक जिसकी आपबीती सुनकर मुझे दर्द हुआ तो उसका लिखा लेख आप तक पहुंचा रहा हूँ, क्योंकि आप जनता है एवं आपको जानने का अधिकार है... इस विशेष नागरिक का नाम गुप्त रखता हूँ... इस अनाम व्यक्ति की इस आपबीती पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, क्या आप इनसे सहमत है, आपकी प्रतिक्रिया का इन्तजार रहेंगा ....

मेरा नाम ......है, 

स्मार्ट सिटी बनने जा रहा इंदौर जो पुरे भारत में स्वच्छता में पहले नंबर पर है, इसकी बहुत ख़ुशी है और इसी ख़ुशी के साथ सोचा की क्यों न इस स्वच्छ शहर का भ्रमण किया जाए. 

इसके लिए मैं सबसे पहले इंदौर के सुखलिया से तिलक नगर के लिए निकला, जिसके बीच की दूरी लगभग 8-9 कि.मी. है, और मै यह जानकार बहुत हैरान हुआ था की मात्र 8-9 कि.मी. दूरी सिटी वैन और सिटी बस में तय करने में मुझे एक घंटे से अधिक समय लग गया, जिस दूरी को स्वयं के यातायात साधनों से मात्र 20-25 मिनट में आसानी से तय की जा सकती है |

उसके बाद मैंने इंदौर की गौरवशाली धरोहर राजवाडा जानए का मन बनाया( शाम का समय ) जिसके लिए अब मैंने ऑटो रिक्शे वाले को चुना, तब मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ की कैसे ऑटो वाले मनमाने तरीके से किराया लेते है.. ऑटो वाले ने मीटर से किराया लेने से मना कर दिया और सिर्फ जाने का किराया दो गुना कर के बताया, फिर हम राजवाडा जाने लगे, पर रास्ते में इतना ज्यादा ट्रैफिक था की लगभग 5 किमी० जाने में हमें आधे घंटे से भी अधिक समय लगा|

क्या यह है हमारा स्वच्छ इंदौर, स्वच्छता की उपाधि हासिल करना हमारे लिए गौरव की बात है पर क्या सिर्फ यही हमारे लिए काफी है |

यहाँ परिवहन सेवा में मनमानी चलती है, इसे रोकना बहुत आवश्यक है | अधिकारीयों द्वारा कम से कम एक बार तो परिवहन समस्यायों का ब्यौरा लिया जाना चाहिए , ताकि समस्यायों को समझकर उनका निपटारा किया जा सके |

यातायात के मामले में इंदौर अभी भी पिछड़ा हुआ है | यातायात, जिसका प्रबल होना शहर की प्रगृति के लिए आवश्यक है | 

यदि हम दिल्ली और मुंबई की बात करे तो जहाँ दिल्ली में 40 किमी० की दूरी तय करने में लगभग 1.30-2.00 घंटे लगते है, वहीँ इंदौर में इससे भी आधी दूरी तय करने में 2 घंटे से अधिक समय लग जाता है |

वहीँ बाम्बे में जहाँ रिक्शे वाले बिना मीटर रीडिंग के कार्य नहीं करते वहीँ इंदौर जैसे विकासशील शहर में रिक्शे वाले अपनी मनमानी चलते है, क्या ऐसे हो रहा है इंदौर का सही विकास....

इंदौर में परिवहन विभाग द्वारा कहा जा रहा है, कि सिटी बसों को इंदौर के हर कोने में पहुँचाया जा रहा है, पर क्या परिवहन सेवा सच मे भी इंदौर के हर कोने में पहुँच पा रही है ? नहीं, आज भी कई जगह ऐसी है जहाँ पर 8 सीटर गाड़ियों में 15-16 लोगों को बैठाया जाता है, क्या यह सही है, ऐसे में कई अपराधो को बढ़ावा मिल रहा है, ऐसे में ही घटनाएं होती हैं | 

ऐसी स्थिति है, हमारे स्वच्छता में नंबर 1 इंदौर की, हमारे सभी के सकारात्मक प्रयासों से भारत में इंदौर तो स्वच्छता में सबसे आगे है ,पर क्या परिवहन जैसी मुलभुत सुविधा में इंदौर को आगे नहीं आना चाहिए, जिसकी हमारे विकासशील शहर को अब ज्यादा जरुरत हैं |

यहाँ आम लोगों का अमूल्य समय परिवहन में निकलता है, यदि उन्हें इंदौर जैसे छोटे शहर में ज्यादा दूरी पर जाना हो तो |

क्या यह स्थिति सुधारी नहीं जा सकती है ... दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों के समान परिवहन सेवा इंदौर में भी विकसित की जा सकती हैं |

मिनी बाम्बे कहलाने वाले इस शहर में मेट्रो की सुविधा शुरू की जा सकती है, रिक्शे वालों की मनमानी ख़त्म कर मीटर से ऑटो अनिवार्य किया जाना चाहिए जिससे जनता के समय की बचत होगी , इंदौर का विकास होगा | 

आइये हम सब मिलकर इंदौर को स्वच्छ और ट्रैफिक रहित शहर बनाये.....



© 2017 All Right Reserved