श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

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इस बार भी बेटियाँ सबसे आगे है .

तारीख : May 29, 2017 कुल देखें : 18

CBSE बारहवी परीक्षा का परिणाम आ चूका है, जिसे देख कर बहुत प्रसन्नता हो रही है, क्योंकि इस बार भी बेटियाँ सबसे आगे है ..

नोएडा की रक्षा गोपाल ने पुरे देश में सर्वश्रेष्ठ अंक हासिल किये है उन्हें बहुत-बहुत बधाई... 

सूर्योदय परिवार की तरफ से उन सभी बच्चों को जिन्होंने अच्छे परिणाम प्राप्त किये है, उन्हें बधाई तथा कुछ कारणवश जो अच्छे परिणाम प्राप्त नहीं कर पायें वह पुन: प्रयत्न करे सफलता आपकी राह देख रही है....

वर्तमान में लड़कियों की शिक्षा के स्तर को देखते हुए बहुत ही ख़ुशी महसूस हो रही है, क्योंकि भारतवर्ष में ऐसा भी समय था जब स्त्रियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, यह समय जल्द ही गुजरा और स्त्रियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया ..

पूर्व में लड़कियों की शिक्षा में केवल घरेलु कार्य ही शामिल थे, पूर्णत: रूढ़िवादिता छाई थी.... तब राजाराम मोहनराय जैसे समाज सुधारकों की बदौलत समाज में छायी रूढ़िवादिता को हटाने के सार्थक प्रयास किये गए....

संकृत में एक उक्ति है – 

“ नास्ति विद्यासमं चक्षुनास्ति मातृ समोगुरू ”. मतलब दुनियां में विद्या के समान क्षेत्र नहीं और माता के समान गुरु नहीं ... माता शिक्षावान हो तो बच्चो में शिक्षारुपी गुण स्वयं ही निखर जाता है ...

स्त्री शिक्षा का अर्थ है आत्मनिर्भर बनाना अर्थात स्त्री शिक्षा प्राप्त करके समानता से हर क्षेत्र में अपना योगदान दे ...

भारत में जहाँ कन्या भ्रूण हत्या, वंश बढ़ाने के लिए लड़कों की चाह जैसी रूढ़िवादिता हैं, वहीँ देश की लड़कियां शिक्षा में लड़कों से आगे बढ़ रही है, यह आंकड़ा प्रत्येक वर्ष बढ़ता जा रहा हैं ...

सरकार भी बेटियों को बचाने हेतु कई योजनाएँ चला रही है, जिसमे “बेटी बचाओ बेटी पढाओ” तथा शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए “सर्वशिक्षा अभियान” पुरे देश में जोर- शोर से से चलाया जा रहा है ... इन योजनायों से भारत में शिक्षा के स्तर में काफी सुधार आया हैं ...

हमें ख़ुशी होती है कि हमारा सूर्योदय ट्रस्ट प्रतिभावान बेटियों के लिए कई योजनाओं पर पुरे देश में काम करती है , जैसे सूर्योदय छात्रवृत्ति योजना, सूर्योदय कुहू कन्या सुरक्षा योजना , तथा सूर्योदय स्नेह आधार योजना.

महिलाओं की शिक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी पुरषों की ...जैसे एक सिक्के के दो पहलु , साइकिल के दो पहिये समान होतें है, समान महत्व है ..वैसे ही राष्ट्र एवं समाज की उन्नति के लिए स्त्रियों की शिक्षा भी आवश्यक है....



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