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शिक्षकों के साथ व्यव्हार

तारीख : May 23, 2017 कुल देखें : 65

स्कूल और कॉलेज में आपके बीते दिनों को याद करें और अपने प्रिय शिक्षक के बारे में सोचें। उनको किस बात ने इतना विशेष बनाया ? कुछ ऐसे है जिन्हे आप उनके आकर्षक तरीके से अध्ययन कराने के तरीके के कारण याद करते हैं, पर कुछ ऐसे भी है जो छात्रों के प्रति सहयोगी व्यवहार और सहानुभूति भाव दिखाते हैं और इस कारण आप उन्हे सानुराग याद करते हैं । एक श्रेष्ठ शिक्षक अक्सर दोनों का मिश्रण होता है। देश में जहाँ शिक्षा व्यवस्था को सुधारने पर जोर दिया जा रहा है, वही सिंगरौली के एक सरकारी स्कूल में 400 शिक्षको को सामूहिक विवाह में खाना परोसने का लिखित आदेश दिया गया .....क्या यह आदेश सही था ? सर्वशिक्षा अभियान की जो मुहिम हमारे देश में चल रही है, उसके अंतर्गत क्या यह कार्य शिक्षको को दिया जाना चाहिए था .. शिक्षा, विचारधारा और नैतिकता को जीवंत रखने की कड़ी है और इस ज्ञानरूपी व्यवस्था के व्यवस्थापक शिक्षक कहलाते है ..ना सिर्फ व्यक्ति विशेष का या फिर समाज का बल्कि युगों के निर्माण में भी शिक्षको की भूमिका सबसे अमूल्य रही है ..

मध्य प्रदेश की यह घटना उस जगह पर हुई जहाँ अभी भी शिव को गुरु का रूप दिया गया है ऐसे में यह परम्परा मेरे समझ से परे है , की ऐसी कौन सी मानसिक मतभेद उस अधिकारी के मष्तिष्क में उपज रहा था जिससे हार कर ऐसे अनैतिक और अमर्यादित आदेश पारित कर दिया गया ..

हमें ये नहीं पता की बाद में जो हुआ, चाहे वो शिक्षको की नाराजगी हो, या फिर मामले की जाँच हो, या जाँच के बाद दोषी अधिकारी दण्डित हो जाये अपितु हमें जिस बात का डर सता रहा है, उसका सार यह है की जिस स्वच्छ परिवर्तन की हम बात कर रहे है, जिस शिक्षा को संस्कारों से जोड़ने पर बल दे रहे है वैसे में ऐसी घटनाये शुभ संकेत नहीं है.

इतिहास सदैव उसी व्यक्ति को याद रखता है, जिसके विचारों ने समाज में एक सरल, सुगम और प्रगति का पथ तैयार किया हो... इतिहास उस व्यक्ति को कभी माफ़ नही करता जिसकी एक वैचारिक भूल सभ्य समाज के जड़ को संक्रमित कर दे .मेरा अध्यात्म ऐसे संक्रमित विचारधारा के लोंगो के लिए सहानुभूति रखता है ईश्वर उन्हें भी सदबुद्धि प्रदान करे ..



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