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prarak kathaye

विनम्रता  ही मनुष्य को महान बनाती है |  02-05-2016

मित्रों, विनम्रता हमारी जिन्दगी में हमारे स्वाभाव के लिए वो बेहतरीन तोहफा है, जिसे अपनाकर हम सामने वाले के साथ-साथ अपने मन पर भी एक सकारात्मक असर डालते हैं।  तो आज विनम्रता से जुडी एक शिक्षाप्रद कथा आप सबको सुनाता हूँ –



कथा कुछ इस तरह है -- एक संत अपनी तीर्थ यात्रा पर थे और उन्होंने वृन्दावन जाने का सोचा लेकिन पहुँचने से पहले ही जब वो कुछ मील की दूरी पर थे तो रात हो गयी।  उन्होंने अपने मन में ये ख्याल किया कि चलो क्यों ना आज पास के ही एक गाँव में रात्रि विश्राम कर लूँ और फिर सुबह जल्दी उठकर अपनी यात्रा प्रारम्भ कर लूंगा |  उनका (संत)  का एक नियम था कि वो केवल उसी घर का जल और अन्न ग्रहण करते थे जिनके घर में लोगो का आचार, विहार और विचार पवित्र हो।  उन्होंने इस बारे में पूछताछ की तो उन्हें किसी ने बताया की ब्रज के पास ये जो सीमावर्ती गाँव है, वंहा लोग सभी वैष्णव हैं और सब के सब कृष्ण के परम भक्त हैं |



संत उस गाँव में गये और एक व्यक्ति के घर का द्वार खटखटाया और उनसे कहा कि ” भाई मैं थोडा विश्राम करना चाहता हूँ तो क्या मैं आपके घर रात बिता सकता हूँ और मैं केवल उसी के घर का भोजन और पानी ग्रहण करता हूँ जिसके घर का आचार विचार शुद्ध हो | इस पर उस व्यक्ति ने कहा महाराज क्षमा करें मैं तो निरा अधम हूँ लेकिन मेरे अलावा हर कोई जो इस गाँव में रहता है बहुत ही पवित्र विचारों वाले हैं लेकिन फिर भी अगर आप मेरे घर में कदम रखकर मेरे घर को पवित्र करते हैं तो मैं अपने घर को और अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली मानूंगा |



संत कुछ नहीं बोले और आगे बढ़ गये और फिर आगे जाकर उन्होंने एक और व्यक्ति से रात बिताने के लिए विनती कि तो उसने भी वही जवाब दिया जो पहले व्यक्ति ने दिया था और इस तरह संत  जिसके भी घर गये और सबसे यही बात कही और सभी ने एक ही जवाब दिया।  इस पर संत को स्वयं पर लज्जा महसूस हुई कि वो एक संत होकर इतनी छोटी सोच रखते हैं जबकि एक आम आदमी जो गृहस्थ है, वो अपने परिवार के जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी कितना उत्तम आचरण लिए हुए है कि खुद को सबसे छोटा बता रहा है।  अपनी भूल समझकर वो एक व्यक्ति के पास गये और उससे कहा  क्षमा कीजिये अधम आप नहीं अधम तो मैं हूँ जो जिन्दगी का एक छोटा सा सार भी नहीं समझ सकता, इसलिए मैं आपके घर रात बिताना चाहता हूँ।  मैं समझ गया हूँ कि आप सब लोग सच्चे विनम्र है और साथ ही सच्चे वैष्णव भी और मैं आपके घर का खाना और पानी ग्रहण करके खुद को पवित्र करना चाहूँगा |



मित्रों यह कथा जीवन में विनम्रता की सच्ची पहचान बताती है खुद को छोटा समझना और दूसरों से अपनी तुलना नहीं करना ही आपको असल जिन्दगी में महान आचरण वाला बनाता है।  इस कथा का सार यह है कि विनम्रता, सच्चचरित्रता  मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है।  आपकी विनम्रता ही आपको महान बनाती है। 


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