श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

प्रेस विज्ञप्ति

राष्ट्रसंत श्री भय्यूजी महाराज को उनके उत्कृष्ट समाज सेवा के लिए डी. लिट. की मानद उपाधि प्रदान की गई 14-04-2016

आज देश एक अलग तरह के वैचारिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है।  जहाँ एक तरफ  देश आतंकवाद, नक्सलवाद, बाजारवाद, बढ़ती महगाई, सुखा, किसानों की आत्महत्या, ग्रामीण विकास जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तो वहीँ दूसरी तरफ समाज का एक वर्ग राष्ट्र में सहिष्णुता- असहिष्णुता, राष्ट्र प्रेम एवं देश द्रोह जैसे मुद्दों पर वैचारिक मंथन कर सरकार को देश की मूल समस्याओं से भटकाने का कुत्सित प्रयास कर रहा है। यह विचार राष्ट्रसंत श्री भय्यूजी महाराज ने आज डी. वाय. पाटिल विश्वविद्यालय कोल्हापुर में आयोजित चौथे दीक्षांत समारोह में कहे। 
देश में अभी हाल ही में छिड़े सहिष्णुता एवं असहिष्णुता के मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि यह देश श्री कृष्ण एवं महात्मा गांधी के विचारों से चलने वाला देश हैं। जो लोग देश में असहिष्णुता की बात करते हैं वो सही मायने में समाज को समझते ही नहीं। सही मायने में देश में सहिष्णुता तब खत्म होगी जब हम एक दूसरे की मदद करना बंद कर देंगे और जब हमारे संयम का अंत होगा।  पर मेरा मानना है कि भारत में सहिष्णुता तब तक रहेगी  जब तक आध्यात्म जीवित है। 
राष्ट्रसंत ने देश में चल रहे राष्ट्र प्रेम एवं देश द्रोह के मुद्दों पर अपने  वक्तव्य में कहा कि यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में आज कुछ लोगों द्वारा जातिगत एवं मुद्दों पर आधारिक राजनीति हो रही है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम  पर तथाकथित बुद्धिजीवी लोग राष्ट्र के विरोध में बातें कर संसद में इसे बहस का विषय बना कर देश एवं संसद का नुकसान कर रहे हैं। आज लोग मुद्दों पर आधारित प्रसिद्धि पाने की होड़ में लगे हैं जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण हैं। 

देश की वर्तमान दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए भय्यूजी महाराज ने कहा कि आज हमारा समाज पूर्णतः बाज़ारवाद से प्रभावित है।  देश में 20 करोड़ लोगों के पास खाने के लिए अन्न नहीं है, वहीं 36 करोड़ लोगों के पास पहनने के लिए कपडे नहीं हैं। आज गांव का हर तीसरा घर गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा हैं। हमारे देश में दो देश निर्मित हो गए हैं -- एक है इंडिया जो विकसित है, जहाँ लोगों के पास सभी तरह की सुख सुविधाएं उपलब्ध  हैं, वहीं दूसरा देश है भारत जहाँ किसान आत्महत्या कर रहें हैं, जहाँ का अधिकांश क्षेत्र सूखे की चपेट में है, जहाँ महिलाओं की स्थिति अत्यन्त दयनीय है, कहीं वो डायन घोषित कर दी जाती हैं, तो कहीं देवदासी और कइयों को तो वैश्यावृति के दलदल में धकेल दिया जाता हैं, जो की एक अत्यन्त दुःखद स्थिति है । हमें इन विषम परिस्थितियों से उबरना होगा। 

दीक्षांत समारोह में विशाल छात्रों को सम्बोधित करते हुए श्री भय्यूजी महाराज ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ना है तो सर्वप्रथम जीवन में संयमता का अनुपालन करते हुए सरलता, सहजता के साथ आगे बढ़ते जाएँ। उन्होंने उपस्थित छात्रों को डी वाई पाटील के जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेने का आग्रह करते हुए कहा कि उन्होंने इस विश्वविद्यालय की स्थापना कर इंडिया एवं भारत के बीच की खाई को पाटने के कोशिश की और पुरे देश को उत्कृष्ट शिक्षा के माध्यम से देश को सुसंस्कृत, संस्कारवान एवं राष्ट्रीयता के भावना से ओतप्रोत छात्र दिए जो सच्चे मन से मानवता की सेवा कर सके। 
इससे पूर्व राष्ट्रसंत श्री भय्यूजी महाराज को अपने ट्रस्ट श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट के विभिन्न सामाजिक प्रकल्पों के माध्यम से समाज के गरीबों, वंचितों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हेतु किये गए उत्कृष्ट कार्यों हेतु महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान - डी. वाय. पाटिल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित चौथे दीक्षांत समारोह में उन्हें 'डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स' (डी.लिट.) की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया|  दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि डॉ के एन गणेश (संचालक - आई आई एस ई आर, पुणे) द्वारा मानद 'डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स' (डी. लिट.) की उपाधि दी गई। कुलपती डॉ. विजय भटकर ने समारोह की अध्यक्षता की। समारोह में प्रमुख रूप से पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाय. पाटील, डी. वाय. पाटील विद्यापीठ ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. संजय डी. पाटील,  डी. वाय. पाटील विद्यापीठ ट्रस्ट उपाध्यक्ष श्री सतेज डी. पाटील, कुलगुरु प्रा. एस. एच. पवार, कुलसचिव डॉ. विश्वनाथ भोसले उपस्थित थे। समारोह में गणमान्य अतिथियों के संग संग बड़ी संख्या में विष्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। 

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