श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

सूर्योदय लावारिस मृत देह अन्येष्टि योजना

सन : 01-06-2009 स्थान : मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र


मूल भावना – मानव जीवन कहने को तो ईश्वर का वरदान है, लेकिन जीवन में आने वाले संघर्ष सदा मनुष्य के लिए दुखदायी रहे हैं | हालांकि संघर्ष जीवन के अभिन्न अंग हैं और मनुष्य की योग्यता को देखते हुए ही ईश्वर ने संघर्ष के तत्व बनाये है | पूरा जीवन अपने उत्तरदायित्वों व कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए मनुष्य कई सारे सुख-दुख सहन करता है | प्रत्येक मनुष्य का अपना एक उद्देश्य है व उसके कर्म करने के पीछे कोई न कोई कारण रहता है | जिसमे सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण किसी व्यक्ति का परिवार होता है | आजीवन अपने परिवार के लिए संघर्ष करता हुआ मनुष्य चाहता है कि उसके मरने के पश्चात उसके अपने उसकी देह का विधिवत अंतिम संस्कार करे, जिससे उसकी मोक्ष प्राप्ति को एक दिशा मिले | शायद यह प्रत्येक मनुष्य का अधिकार भी है |

लेकिन दुर्भाग्य से कई लोग ऐसे हैं, जिनका कोई परिवार ही नहीं होता | पूरी दुनिया में न कोई सगा-संबंधी, न कोई दोस्त, न कोई ऐसा जो उसके प्रति उत्तरदायित्व का भाव रखता हो | ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात् उसके शव का अंतिम संस्कार करने के लिए भी कोई उपलब्ध नहीं रहता, जो बड़ी ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है | सदगुरु श्री भैय्युजी महाराज की प्रेरणा से सूर्योदय परिवार द्वारा ऐसे ही शवों का विधिवत अंतिम संस्कार करने की भावना के साथ इस योजना का प्रारंभ हुआ |

संकल्प – लावारिस शवों के विधिवत अंतिम संस्कार के संकल्प के साथ सूर्योदय लावारिस मृत देह अंत्येष्टि योजना की शुरुआत की गई |

हमारे प्रयास – सूर्योदय परिवार अपनी इस योजना के साथ मध्यप्रदेश के इंदौर, महाराष्ट्र के अकोला, पंढ़रपुर, पुणे में सक्रीय रूप से कार्य कर रहा है, जहाँ सूचना मिलते ही सभी क़ानूनी व न्यायिक औपचारिकओं के निर्वहन के पश्चात लावारिस देह को अपने संरक्षण में लेकर विधिवत उसका अंतिम संस्कार किया जाता है |

चुनौतियाँ – इस योजना की अपनी एक अलग ही चुनौती देखने को मिलती है | सबसे बड़ी चुनौती किसी भी देह को लावारिस तय करना होती है | संभव है कि कोई मृत शरीर ऐसा हो जिसका पूरा परिवार जीवित हो, लेकिन उसकी मृत्यु की जानकारी से अनभिग्य हो | यह स्थिति को बहुत ही गंभीर कर देता है | इसलिए अंतिम संस्कार के पूरे व्यवस्थ्ति तरीके से पहचान संबंधी कार्यवाही करने के पश्चात ही सूर्योदय परिवार अपने कदम आगे बढाता है |

परिणाम एवं सार्थकता – सूर्योदय परिवार अब तक मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र के कई जगहों पर सक्रीय तौर पर इस कार्य में लगा हुआ है एवं सूचना मिलते ही अपने कार्य में लग जाता है | कुछ बुनियादी क़ानूनी व न्यायिक औपचारिकता के निर्वहन के बाद विधिवत अंतिम संस्कार किया जाता हैं, जो अपने आप में एक आत्मिक अनुभूति है, जो मन को शांति प्रदान करती है |

उपलब्धियाँ – सूर्योदय परिवार शव वाहनों के साथ 27X7 घंटे उपलब्ध रहता है एवं सूचना मिलते ही अब तक कई लावारिस शवों का उनके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार कर चुका है |
आकड़े – सूर्योदय लावारिस मृत देह अन्येष्टि योजना के अंतर्गत अब तक ४८९ शवों की अंत्येष्टि की जा चुकी है |

अभियान से जुड़े – “सूर्योदय परिवार” द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान से हर वर्ग एवं आयु के लोग जुड़ सकते है | यदि आप इस अभियान से जुड़ना चाहते है तो आप नीचे दिए गए नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं:


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