श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

सूर्योदय बंदी पुनर्वसन योजना

सन : 01-06-2010 स्थान : मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र


मूल भावना – समाज कितना भी सुधारवादी हो जाए, परन्तु वह व्यक्ति के अपराधों को क्षमा नहीं करता | जब एक व्यक्ति बंदीगृह में अपना जीवन यापन करता है तो समाज की उसकी ओर देखने की द्रष्टि बदल जाती है | उसके परिवार को भी समाज हेय द्रष्टि से देखता है | बंदीगृह से सजा पूर्ण करने पर भी समाज की मानसिकता उनके प्रति सकारत्मक नहीं होती हैं | अपने परिवार के भरण पोषण के लिए या स्वावलंबन के लिए उसे पुनः दर-दर भटकना पड़ता है | ऐसे में हो सकता है कि वह पुनः अपराधों की ओर मुड़े | बंदीगृह में अपनी सजा पूर्ण करने के पश्चात् समाज में व्यक्ति पुनः स्वावलंबी बने, इस हेतु श्री गुरुदेव ने बंदी पुनर्वसन योजना प्रारंभ की है |

संकल्प – अपनी सजा पूर्ण कर कारागृह से रिहा हुए लोगों को पुनः समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के संकल्प के साथ यह योजना प्रारंभ की गई थी और रिहा गये लोगों को एक स्वावलंबी जीवन प्रदान करने की दिशा में प्रयास करने का संकल्प भी सम्मिलित है, जिससे वे फिर कभी अपराध के अंधकारमयी दुनिया की ओर न लौटें |

हमारे प्रयास – सदगुरु श्री भैय्युजी महाराज की प्रेरणा से सूर्योदय परिवार द्वारा पूर्व में भी कारागृहों में जाकर व्याख्यान व आध्यात्मिक शिविर आयोजित किये जा रहे हैं | साथ ही कारागृहों में धार्मिक वाचनालय एवं कंप्यूटर केन्द्रों की स्थापना भी की गई है | सूर्योदय परिवार यह प्रयास कर रहा है की जेल से मुक्त होने के बाद अपनी सजा काल चुके लोगों को एक सुखद व सम्मानजनक जीवन मिल सके | 

चुनौतियाँ – इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती उस मानसिकता का परिवर्तन करना है, जिसके अंतर्गत किसी अपराध के लिए सजा काटकर आये हुए व्यक्ति को समाज में सम्मानजनक स्थान नहीं दिया जाता एवं उनके प्रति हेय व तिरस्कारपूर्ण व्यवहार रखा जाता है |

परिणाम एवं सार्थकता – सूर्योदय परिवार अब तक २२ कारागृहों में धार्मिक वाचनालयों एवं कंप्यूटर केन्द्रों की स्थापना कर चुका है | अपने अपराध की सजा काट रहे लोगों में सकारात्मकता का प्रसार करना ही इस योजना का मूल उद्देश्य है, ताकि सजा पूर्ण होने के बाद वे लोग समाज में पुनः एक सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके |

उपलब्धियाँ – अपनी सजा पूर्ण कर चुके कई लोगों को सूर्योदय परिवार द्वारा कई सकारात्मक कार्यों में संलग किया गया जिसके अंतर्गत उन्हें मंदिरों का पुजारी, संगीतज्ञ, प्रवचनकर्ता आदि बनाया गया है | और वे सभी सफलतापूर्वक अपने भूमिका का निर्वहन कर रहे है | 

आकड़े – अब तक कुल ६ बंदियों का पुर्नवसन किया जा चुका है, जो सूर्योदय परिवार से जुड़कर विभिन्न सकारात्मक कार्यों में संलग्न है, जो महासिद्ध्पीठ ऋषि संकुल में अवस्थित हैं, और मंदिरों में पूजापाठ प्रबंधन का उत्तदायित्व कुशलतापूर्वक संभाल रहे है | 

अभियान से जुड़े – “सूर्योदय परिवार” द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान से हर वर्ग एवं आयु के लोग जुड़ सकते है | यदि आप इस अभियान से जुड़ना चाहते है तो आप नीचे दिए गए नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं:



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