श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

सूर्योदय वन्दे मातरम् नेशनल फाउंडेशन

सन : 26-01-2011 स्थान : पोपटखेड, तह. आकोट जिला अकोला महाराष्ट्र


मूल भावना – किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति से होती है और उसकी संस्कृति की पहचान राष्ट्र में रहने वाले व्यक्ति के आचरण से होती है | देश की रक्षा के लिए हमारे असंख्य वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया है, इन महान देश भक्तों ने हमारी संस्कृति पर कभी आंच नहीं आने दी और इनके बलिदानों ने सदा राष्ट्र प्रेम को जागृत रखा है | एक सैनिक के मन में देश प्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी होती है | यह सीमा पर किसी कहने या स्वार्थ के चलते लड़ने नहीं जाता वरन उसकी अंतरात्मा ही उसे राष्ट्र भावना या अखंडता को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करती है | सदगुरु श्री भैय्युजी महाराज की प्रेरणा से राष्ट्र प्रेम को जगाये रखने के लिए वन्दे मातरम् नेशनल फाउंडेशन की स्थापना की गई | देश में रहने वाले हर व्यक्ति राष्ट्र प्रेम और समर्पण की भावना रखे इसके लिए देश के आदर्शों को उनके सामने रखना आवश्यक है, जिससे उनके आदर्शों का अनुसरण कर हम एक आदर्श राष्ट्र की स्थापना कर सके | 

संकल्प – राष्ट्र के नागरिकों में अपने वीर सैनिकों अथवा शहीदों के प्रति सम्मान बना रहे | देश प्रेम की जिस भावना से कोई व्यक्ति देश की रक्षा के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर करने के लिए तत्पर रह सकता है, उस भावना का सम्मान व रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है | इसी संकल्प के साथ सूर्योदय वन्दे मातरम् नेशनल फाउंडेशन की स्थापना की गई है | 

हमारे प्रयास – समाज व देश के प्रति भाव बना रहे, इसी उद्देश्य से पोपटखेड, तह. आकोट जिला अकोला में सूर्योदय वन्दे मातरम् नेशनल फाउंडेशन की स्थापना की गई | साथ ही एक सामुदायिक भवन का निर्माण भी किया गया | सूर्योदय परिवार नियमित रूप से राष्ट्र भावना से प्रेरित होकर देश को अखंड व सहिष्णु रखने का प्रयास करता है | 

परिणाम एवं सार्थकता – वन्दे मातरम नेशनल फाउंडेशन की स्थापना पोपटखेड, तह. आकोट जिला अकोला में की गई है, यहाँ एक सामुदायिक भवन का निर्माण भी किया गया है | यहाँ २०१० में एक भारत माता की मूर्ति भी स्थापित की गई | 

उपलब्धियाँ – भारत ही इतिहास का निर्माता होता है | और वे हम ही है, जो इतिहास बनाते है | हमारे लिए आवश्यक है कि हमें हमारे इतिहास की पूर्ण जानकारी हो | हमारी परम्पराएँ, संस्कार हमारे लिए सम्मानीय है | वर्तमान में वे संस्कार ही है, जिनकी सर्वाधिक आवश्यकता है | जिससे देश के बच्चों व युवाओं में हमारे इतिहास व महापुरषों के प्रति एक सम्मानजनक विचारधारा प्रभावित हो सके | यदि हम इस प्रयास में सफल हो सके, यही हमारी उपलब्धि होगी | 

आकड़े – महाराष्ट्र के अकोला जिलें की आकोट तहसील के पोपटखेड ग्राम में एक सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया, जहाँ पर वर्ष २०१० में भारत माता की मूर्ति भी स्थापित की गई |



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