श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

पारधी समाज आदिवासी आश्रमशाला

सन : 09-06-2006 स्थान : खामगांव, ग्राम सजनपुरी, जिला बुलढाणा, महाराष्ट्र


मूल भावना – पारधी समाज हमारे देश की सर्वाधिक उपेक्षित जातियों में से एक है | प्राय: वनों में रहने वाली यह जाती ब्रिटिश राज्य के समय सबसे अधिक अपराधिक प्रवृतियों में लिप्त जाती के रूप में जानी जाती थी एवं अग्रेजों ने इस सर्वाधिक अपराध लिप्त जाती घोषित किया था | 

र्तमान में यह जाती मात्र वन उपज एवं वन्य जीवों के शिकार द्वारा ही अपना भरण पोषण करती है | यहाँ तक की भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से भी अनभिज्ञ है |

आज से लगभग १० वर्ष पूर्व श्री सदगुरु भैय्युजी महाराज जब अपने महाराष्ट्र प्रवास पर इस जाति के लोगों से मिले तब उन्होंने इस सम्बंधित जाति के लोगों से भेंट कर उनकी स्थिति के बारे में जानकारी ली | उनके निरक्षर बच्चों और उनकी दयनीय स्थिति को देखकर गुरूजी ने उनकी शिक्षा व्यवस्था व भविष्य सुनिश्चित करने हेतु इस आश्रमशाला की स्थापना करने का प्रण लिया, जिससे इस समाज के बच्चों का जीवन सफल हो सके |


संकल्प – पारधी समाज आदिवासी आश्रमशाला की स्थापना के साथ ही यह संकल्प लिया गया की पारधी समाज के बच्चों को अच्छी एवं श्रेष्ठ शिक्षा प्राप्त हो सके जिससे वे सभी आत्म सम्मान के साथ अपना जीवन–यापन कर सके एवं अपने परिवार का भी भविष्य सुधार सके | 

हमारे प्रयास – पारधी समाज आदिवासी आश्रम शाला एक बड़े एवं पवित्र संकल्प के साथ प्रारंभ की गई थी | सदगुरु श्री भैय्युजी महाराज की प्रेरणा से महाराष्ट्र के खामगांव स्थित ऋषि संकुल महासिद्धपीठ में विद्यालय की शुरुआत की गई जिससे पारधी समाज के बच्चों के विकास व उत्थान के लिए श्रेष्ठ शिक्षा की व्यवस्था की गई | योग्य अध्यापकों के मार्गदर्शन में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आश्रमशाला में पठन-पाठन का कार्यक्रम शुरू हुआ | आश्रम में बच्चों के आवास एवं भोजन की वयवस्था भी सुनिश्चित की गई है | 

चुनौतियाँ – इस प्रकल्प के तहत सूर्योदय परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि पारधी समाज के लोग आम समाज से दूर रहने वाला समाज है उन लोगों तक पहुचाना और उन तक अपनी बात पहुचाना अपने आप में बड़ी चुनौती थी, क्योंकि पारधी समाज के लोग अंतर्मुखी जीवन जीने के आदि है और उनका ठौर-ठिकाना आम दुनिया से अलग था |

परिणाम एवं सार्थकता – सदगुरु श्री भैय्युजी महाराज के पारधी समाज के स्वजनों से भेंट बेहद सकारात्मक रही एवं एक विकसित विद्यालय की स्थापना हुई | आज वो विद्यालय सफलता पूर्वक संचालित किया जा रहा है | जिसमे पारधी समाज के बच्चों को पूर्ण शिक्षा दी जा रही है | संगीत, खेल, कला, साहित्य और धर्म सभी विषयों पर आधारित एक समग्र पाठ्यक्रम विद्यार्थिओं के लिए उपलब्ध है, जो योग्य शिक्षकों द्वारा नीतिगत तरीकों से सिखाया जाता है |

उपलब्धियाँ – इस प्रकल्प के अंतर्गत खामगांव (महाराष्ट्र) में पारधी समाज आदिवासी आश्रमशाला पूर्णत भारतीय सिद्धांतों का पालन करते हुए एक आधुनिक शिक्षण संस्थान की स्थापना की गयी | विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी बहुमुखी प्रतिभा के धनी है, जो खेल, संगीत, कला, साहित्य में निपुण है | 

आकड़े – वर्तमान में इस विद्यालय में ७०० विद्यार्थी साथ में शांतिमय एवं सोहाद्र्पूर्ण वातावरण में आधुनिक शिक्षा ग्रहण कर रहे है |

अभियान से जुड़े – “सूर्योदय परिवार” द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान से हर वर्ग एवं आयु के लोग जुड़ सकते है | यदि आप इस अभियान से जुड़ना चाहते है तो आप नीचे दिए गए नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं:



सम्पर्क सूत्र - 7722992266 - 9



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