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सदगुरु भैय्युजी महाराज के नियम
श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

श्री सदगुरु भैय्युजी महाराज के नियम

ननियम अंधकारमय मार्ग को अपने प्रकाश से प्रकाशित करते हैं | जीवन में नियमों की अनुपस्थिति से सही दिशा प्राप्त करना अत्यन्त कठिन है | प्रत्येक मनुष्य जीवन में अपने कुछ विशेष उद्देश्यों को लेकर आगे बढता है | जिन्हें सफल करने हेतु सही दिशा में कार्य करने की आवश्यकता होती है और यह सही दिशा मिलती है, उन उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बनाए गए कुछ विशेष नियमों के नियमित पालन से | सद्गुरु श्री भय्यूजी महाराज ने अपने विचारों और उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए ऐसे नियमों को अपने जीवन में स्थान दिया है, जो उन्हें अपने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु न केवल स्वयं को सफल बनाने में सहायक हैं; अपितु इन नियमों का लाभ सद्गुरु श्री भय्यूजी महाराज के माध्यम से उन लोगों को भी प्राप्त हुआ है, जिन्होंने इन्हें अपने जीवन में सम्मिलित कर इनका पालन किया है –


  • सामाजिक परिवर्तन करते समय राष्ट्र, समाज और मानवता को सामने रखकर कार्य करना |
  • आदर्शों को अपनाते समय यह ध्यान रखना कि जिनके आदर्श अपना रहे हैं, उन्होंने राष्ट्र और समाज को क्या दिया है और उनका मानवता के प्रति क्या योगदान है ?
  • परिवर्तन के लिए विचार, चिंतन एवं क्रतिव्य तीनों का ध्यान रखना, क्योंकि सिर्फ विचारों से या सिर्फ कृतिव्य से परिवर्तन नहीं आ सकता |
  • समाज के पहल करने का इंतजार नहीं बल्कि परिवर्तन के लिए खुद चलकर समाज के पास जाना |
  • बिना किसी भय के अपने सुविचार और मतों को अभिव्यक्त करना |
  • धर्म अर्थात सदाचरण के माध्यम से श्रेष्ठ कर्म करना |
  • जो अच्छे विचार देता है, जिसने अच्छे कर्म किये है, उनका कभी विरोध नहीं करना |
  • व्यक्ति पूजा के स्थान पर, विचार पूजा करना |
  • बिना किसी व्यक्तिगत लाभ के परायों की सहायता हेतु तत्पर रहना |
  • अनगिनत समस्याओं के पश्चात् भी संयम बनाए रखना | संयम से मानसिक एवं आत्मिक शान्ति प्राप्ति होती है |
  • अपने मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए एक बेहतर जीवन की नीव रखना |
  • वर्तमान की प्रवृति और मानसिकता को पहचानकर युगातित व्यवस्था के अनुकूल विचारों के माध्यम से भय्मुक्त्ता, एकात्मकता, समरसता जैसे गुणों का विस्तार करते हुए कार्य करना |

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