श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

आत्मा की अनुभूति

आज तनावग्रस्त, भयग्रस्त समाज के लिए आत्मचिन्तन, आत्मशुद्धि, आत्म संतुलन विशेष आवश्यक है | व्यक्ति को इस ओर प्रेरित करने के लिए योग आज अधिक प्रासंगिक है |


योग बिन्दु को सिन्धु से मिलाता है | योग वह है, जो प्राणतत्त्व को प्रकृति से जोड़ता है और जो श्वासों की लय को नादब्रह्म में विलीन कर अदभुत आनन्द की प्राप्ति कराता है | वह आनन्द जो परमात्मा से एकाकार कराता है |


योग के माध्यम से योगी अन्तर शुद्धि और बाह्य शुद्धि को देखते हैं | अन्तर शुद्धि से आशय है विचारों की पवित्रता और बाह्य शुद्धि से आशय समाज में व्याप्त व्यभिचार, अनाचार को हटाना | योगी अपने आत्मबल से इस समाज में शुद्धि को संचारित करते हैं, और उसे मानवीय संस्कृति का एक आवश्यक अंग बना देते हैं | भोजन में पोषक तत्त्वों का समावेश करके शरीर को स्वस्थ रखा जाता है | उसी तरह योगी प्राणों को योग के माध्यम से पोषकता प्रदान कर उसे स्वस्थ रखते हैं | प्राणों में विशेष शक्ति का संचार ही आत्म उत्थान का मार्ग है |


नित्य ध्यान साधना द्वारा व्यक्ति अपने सद्गुणों का विकास कर स्वयं परिवर्तन अनुभव करेगा | ध्यान एक अनुभूति का विषय है, आन्तरिक आनन्द का विषय है, प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अन्दर के वास्तविक आनन्द को प्राप्त करने के लिए ध्यान साधना करना चाहिए !


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