श्री सदगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट

योग व प्राणायाम

योग

योग का शाब्दिक अर्थ जोड़ना है | योग जो शरीर को प्रकृति से जोड़े या जो जो प्राणों को सूक्ष्म ऊर्जा से जोड़ता है तथा आत्मा को परमात्मा से जोड़ना है वह योग है | आसनों एवं सूक्ष्म यौगिक क्रियाओं से अनत्स्त्रावी ग्रंधि प्रणाली सुव्यवस्थित होती है | उसका प्रभाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ जीवन के मानसिक द्रष्टिकोण पर भी पड़ता है |


प्राणायाम

प्राण वह वायवीय शक्ति है जो समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त है | वह सजीव व निर्जीव में सभी में समाविष्ट है | जब हम स्वास लेते है तो प्राण वायु का ही उससे घनिष्ठ संबंध है | प्राण हवा की अपेक्षा अधिक सूक्ष्म है | प्राण शक्ति समस्त जड़ चेतन में व्याप्त है | प्राण के माध्यम से ही शरीर और आत्मा के बीच संबंध स्थापित होता है | प्राण शक्ति ही है, जो भौतिक तथा चेतन शक्ति से हमें जोडती है | अध्यात्मिक साधकों के लिए प्राणायाम बहुत उपयोगी है | क्योंकि प्राणायाम से शरीर स्वस्थ रहता है | मन की एकाग्रता बढती है | विचार प्रणाली में नियंत्रण आता है | मन शांत रहता है | यदि मन में एकाग्रता नही है, मन में अनेक विचार चल रहे है, तो ध्यान नही लग सकता | दोनों नासिका छिद्रों में श्वास गति समान रहने पर इडा एवं पिंगला में संतुलन आ जाता है | इस अवस्था में प्राणायाम शरीर में स्थित सुषुम्ना नामक सबसे महत्त्वपूर्ण नाड़ी का प्रवाह प्रारंभ होता है | इस अवस्था में साधक गहरे ध्यान में जाता है |


ध्यान

ध्यान शब्द को देखे तो उसका अर्थ बड़ा विस्तृत होता है | सुबह उठने से लेकर रात्रि सोने तक की शरीर को जो भी क्रिया-प्रतिक्रिया होती है, उसमें ध्यान आवश्यक है | प्रातः उठते से ही हमें यह ध्यान रखना आवश्यक है, कि हमारा पांव हम सही दिशा में रख रहे अथवा नही | भोजन करते समय भोजन की थाली और ग्रास मुंह में लेने तक हम ध्यान रखते है | गाड़ी चलाते समय हमारा ध्यान गाड़ी की रफ़्तार, ब्रेक और आमने-सामने, दांये-बाएं सभी दूर होता है | प्रातः ध्यान का संबंध मन-मस्तिष्क से जोड़ा जाता है | दोनों के संतुलन के लिए ध्यान आवश्यक है |


आध्यात्मिक धरातल पर ध्यान वह प्रक्रिया है, जो समस्त एकाग्रता प्रदान करती है | मन की एकाग्रता के पश्चात ही व्यक्ति अपनी सूक्ष्म नाड़ी केंद्र एवं सूक्ष्म चक्रों की ओर एकाग्रता स्थापित करता है | सूक्ष्म चक्रों का ध्यान व्यक्ति के अन्तर में ऊर्जा प्रदान करता है | यह एक ऐसी ऊर्जा है, जिसके माध्यम से व्यक्ति बुद्धि-विवेक का संतुलन रखकर दिव्य चेतना के माध्यम से अनेक कठिन से कठिन कार्य सहज कर लेता है और अनेक समस्याओं का निदान व्यक्ति सहज ढूढ लेता है | ध्यान के माध्यम से व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और अनेक बाह्य तनावों से मुक्ति मिलती है | इसलिए आज की परिस्थिति में ध्यान करना आवश्यक है |


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